गणेष षंकर विद्यार्थी जी को 124 वीं जयन्ती पर याद करेगा हिन्दुस्तान

संतोष गंगेले, मध्य प्रदेश
गणेष षंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब का संकल्प है कि मध्य प्रदेष के प्रत्येक थाना /तहसील/जिला/ संभाग तक इस संस्था के सदस्य नियुक्त कर गणेष षंकर विद्यार्थी जी के जीवन व उनके कमयोगी होने की बात जन जन तक पहुॅचे । बर्तमान समय में पत्रकारिता के दायित्व से पीछे हठ रहे पत्रकारों को उनकी जीवन व मार्गदर्षन से कर्मठ एवं लग्नषील पत्रकार बनाने का प्रयास जारी है । गणेष षंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब के संस्थापक प्रदेष अध्यक्ष संतोष गंगेले ने गणेष षंकर विद्यार्थी जी के जीवनी का अध्ययन करने के बाद तय किया है कि वह अपने मध्य प्रदेष के अंदर तो कम से कम अपने पत्रकार साथियों को इस संगठन के माध्यम से जोड़ने का पूरा प्रयास जारी रखेगे । भारत देष की आजादी के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने बाले भारतीय पत्रकारिता के पुरौधाष्षहीद गणेष षंकर विद्यार्थी का जन्म आष्विन षुक्ल चतुर्दषी संवत् 1947 दिनांक 26 अक्टूवर 1890 को श्रीमती गोमती देवी श्रीवास्तव (कायस्थ) की कोख से हुआ, उस समय श्रीमती गोमती देवी अपने पिता जी के घर अतरसुईया मोहल्ला इलाहावाद में थी इसलिए उनका जन्म ननिहाल में हुआ । इनके पिता का नाम बाबू जय नारायण लाल थें । सामप्रदायिक एकता के प्रतीक अमरषहीद गणेष षंकर विद्यार्थी जी के प्रपितामह (परदादा) का नाम मुंषी देवी प्रसाद था जो हथाॅव जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेष के निवासी थें । इनके दादा जी का नाम बंषगोपाल उनके पुत्र बाबू जय नारायण लाल थें जो षिक्षक रहे । गणेष षंकर विद्यार्थी जी का विवाह 19 बर्ष की आयु में हेा गया था । अपनी अल्य आयु में जो कार्य किए वह समाज व देष हितों के लिए किए गये , उन्हे भारतीय इतिहास में उचित स्थान दिया गया है ।

गणेष षंकर विद्यार्थी जी का जीवन गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए हुआ था । उन्होने अपने जन्म के बाद देष के लिए अनन्त व अद्भुत कार्य किए जिनका बिन्दुवार विवरण नही दिया जा सकता है लेकिन उन्होने त्याग, समर्पण, कर्मयोगी के साथ समाज एवं देष केलिए कार्य किए । गणेष षंकर विद्यार्थी जी बचपन के वारे में लिखा है कि वह एक दुबले-पतले वुध्दिमान व्यक्ति थें उनके अंदर समाज व देष के प्रति समर्पण था, वह देष को गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए अपने मित्रों, सहयोगियों से लगातार संपर्क करते हुये षिक्षा ग्रहण करने के वाद नौकरी करने लगे । लेकिन उन्होने नौकरी को छोड़कर राजनैतिक दलों के साथ कार्य किया । साहसी, वुध्दिमान, योग्यता के साथ साथ मानवता के धनी गणेष षंकर विद्यार्थी जी ने अपने मित्र पंडित सुन्दर लाल के सम्पर्क में आने के बाद उन्हे पत्रकारिता से मोह हो गया और उन्होने क्राॅतिकारी महर्षि अरविन्द घोष के कर्मयोगिन से प्रभावित होकर एक पत्र कर्मयोगी समाचार पत्र को अपने लेख लिखने लगे यही से उन्होने पत्रकारिता की ष्षुरूआत की इसके बाद अनेक समाचार पत्रों से जुड़ते चले गये । उन्होने आचार्य महावीर प्रसाद व्दिवेदी के सरस्वती समाचार पत्र में संपादन के साथ अनेक सालों तक वह पत्रकारिता के साथ जुड़े रहे । उन्होने तय किया कि वह देष की स्वाधीनता के लिए स्वयं अपना समाचार पत्र प्रकाषित कर कार्य करेगें । उन्होने अभ्युदय समाचार पत्र से कार्य छोड़कर पंडित षिवनारायण मिश्र के साथ बिचार विमर्ष करने के बाद स्वंय का समाचार पत्र प्रकाषन करने का तय किया । विधिक कार्यावाही करने के वाद 9 नवम्बर 1913 को प्रताप समाचार पत्र का उदय हुआ । गणेष षंकर विद्यार्थी जी ने इस समाचार पत्र के लिए स्वयं का अनुभव एकत्रित करते हुये समाचार पत्र को प्रकाषन में सैकड़ों कठिनाईयों का अनुभव किया , लेकिन समाचार पत्र प्रकाषित करने के संकल्प को छोड़ा नही । धीरे धीरे स्वयं का प्रेस लगाया , साईकिल से समाचार पत्र का वितरण करना एवं करवाना था । देष व समाज के लिए समाचार प्रकाषित करने का होसला बुलंद किया । अंग्रेजी हुकुमत के सामने झुके नही जिस कारण अनेकों वार प्रताप समाचार पत्र को बंद किया गया तथा गणेष षंकर विद्यार्थी जी को जेल भेजा गया ।

साप्ताहिक समाचार पत्र प्रताप ने गुलाम भारत के आम नागरिकों को जगाने के लिए आग में घी का कार्य किया । इसके बाद प्रेस के संसाधन एकत्रित कर लेने के बाद गणेष षंकर विद्यार्थी जी इस समाचार पत्र को 23 नवम्बर 1920 से दैनिक कर दिया । प्रताप समाचार पत्र के जरिये अपनी बात जनता तक पहुॅचाने में प्रताप समाचार पत्र का महत्व पूर्ण योगदान रहा । प्रताप समाचार पत्र ने अंग्रेजी की नींव का हिलाकर रख दिया । समाचार संपादक ने अनेक कठिनाईयों एवं मुकदमावाजी से संघर्ष किया, जेल यात्रायें की लेकिन समाचार पत्र का प्रकाषन बंद नही किया ।

गणेष षंकर विद्यार्थी जी एक विवेकी, आदर्षवादी व कुषल राजनीतिज्ञ थें । साथ ही वे एक निडर व देषभक्त पत्रकार भी थें । उन्होने अपने ओजस्वी विचारों को अपिने समाचार पत्र (प्रताप ) के जरिए जनता तक पहुॅचाया । दलबदी और धार्मिक पक्षपात से दूर रहते हुए उन्होने स्वतंत्रता आंदोलन की एक ऐसी पृष्ठभूमि तैार की जिससे ब्रिटिष सरकार की नींव तक हिल गई । उन्होने हिन्दु मुस्लिम एकता के लिए अनेकों वार जान जोखिम में डाली ।

23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी सरकार ने सरदार भगत सिंह को फाॅसी दी जिससे जनता बोखला गई तथा सरकार के खिलाफ नारे बाजी दंगों में परिवर्तन हो गई । कानपुर में हिन्दु मुस्लिम दंगों को अनेकोवार रोकने के बाद भी दंगे षांत को पूरा प्रयास किया । 25 मार्च 1931 को अपने साथी राम रतन गुप्त जी चैवे गोला मोहल्ला से होते हुए मठिया पहुॅचे जहां कुछ देषद्रोही लोगों ने घेर कर गणेष षंकर विद्यार्थी जी की हत्या कर दी । गणेष षंकर विद्यार्थी जी ने अपने जीवन में कभी किसी को धोका नही दिया, मानव सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी थी । उन्ही के विचारों से प्रभावित होकर हरिहर भवन नौगाॅव (बुन्देलखण्ड) में उनके नाम से एक पत्रकारों का संगठन 1 जनवरी 2013 को गठित किया गया जिसका नाम गणेष षंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब दिया गया । इस गणेष षंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब संस्था का प्रधान कार्यालय हरिहर भवन तहसील के पास नौगाॅव जिला छतरपुर मध्य प्रदेष रखा गया तथा इसका कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण मध्य प्रदेष बनाया गया है । गणेष षंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब प्रदेष अध्यक्ष -संतोष गंगेले ने अपनी प्रान्तीय समति में सात लोगों को ष्षामिल किया गया जिसमें राजेन्द्र गंगेले प्रान्तीय उपाध्यक्ष, कमलेष जाटव सचिव, राजेष षिवहरे संयुक्त सचिव, लेाकेन्द्र मिश्रा एवं भगवान दास कुषवाहा को प्रान्तीय सदस्य बनाया गया है । ष्षहीद गणेषषंकर विद्यार्थी हिन्दी पत्रकारिता के पुरौधा, देष के सुधारवादी नेता , स्वधीनता आन्दोलन के कर्मठ सिपाही रहे । उनकी जयन्ती पर प्रेस क्लब उन्हे याद करते हुये उनके पदचिन्हो पर चलने का प्रयास जारी रहेगा ।

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